राम बहादुर राय, देश की पत्रकारिता के क्षितिज पर आकाशदीप की तरह हैं. पिछले पाँच दशक से अधिक समय से भारतीय राजनीति, सत्ता और अनेकानेक आंदोलनों, परिवर्तनों को उन्होंने बतौर पत्रकार नज़दीक से देखा-समझा है. जयप्रकाश नारायण के निकट सहयोगी के तौर पर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भी काफ़ी सक्रिय रहे. वीपी सिंह और चंद्रशेखर से लेकर नरेंद्र मोदी तक, देश के तमाम प्रधानमंत्रियों को करीब से जानने- समझने वाले रामबहादुर राय ने पत्रकारिता के सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया. लोभ, दंभ और संबंध कभी डिगा नहीं सके. हिंदी और हिंदी समाज उनके शक्ति-स्रोत रहे. व्यापक जनसरोकर और देशहित में निर्भीक और अनुकरणीय पत्रकारिता के प्रतिमान रामबहादुर राय को ‘स्पंदन‘ के मंच से सुनना रोमांचकारी होगा

