अब्दुल बिस्मिल्लाह, हिंदी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न और वैविध्यपूर्ण रचना संसार वाले समादृत साहित्यकार हैं. आज के कथाकारों में अग्रणी पीढ़ी से आते हैं. समाज के यथार्थ से दो-दो हाथ करते हुए वे कई तरह के परिवर्तनों की प्रस्तावना तैयार करते हैं. बुनकर समाज पर अब्दुल बिस्मिल्लाह का उपन्यास ‘ झीनी झीनी बीनी चादरिया’ हिंदी साहित्य में मील का पत्थर माना जाता है. अपने विशाल कथा संसार के ज़रिए वे भारत के हाशिए के समाज को कंठ देते हैं. अब्दुल बिस्मिल्लाह के जीवन का सहयात्री विपुल अनुभव है, जो उनके व्यक्तित्व से ध्वनित और प्रतिबिंबित होता है. ‘स्पंदन’ का मंच आपका हार्दिक स्वागत करता है

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