सिनेमा के कथित कुलीन परिवेश में अन्नू कपूर हिंदी की लोक सुगन्ध का हस्तक्षेप हैं. वे अपने कहन में भाषा का आस्वाद पैदा करते हैं . रंगमंच से लेकर बड़े और छोटे पर्दे तक, अपने अभिनय और संवाद से अन्नू कपूर ने अलग पहचान बनाई है. जीवन के दुर्गम रास्तों ने अनुभव की अनमोल थाती दी. वह एक संवेदनशील कलाकार को बनाने में पूंजी के तौर पर खर्च हुई. अन्नू कपूर उन चुनिंदा अभिनेताओं में आते हैं, जिन्होंने ना सिर्फ़ हिंदी से जीविकोपार्जन किया बल्कि हिंदी को जिया भी . हिंदी समाज, उसका परिवेश, परंपरा, सोच, संस्कार और संक्रमण तक का सम्यक् बोध अन्नू कपूर को रहा है. जीवन, अभिनय और उपलब्धियों के बीच उनका जो अनुभव संसार पसरा है – हिंदी का अंतर्मन ऐसे ही ठौर-ठिकानों पर मिलता है. ‘स्पंदन’ का मंच अन्नू कपूर के साथ उसकी ही तलाश करेगा. .

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