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नासिरा शर्मा

स्पंदन डेस्क
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नासिरा शर्मा हिंदी के उन चुनिंदा लेखकों में है जो विषय के स्तर पर बड़ा जोखिम उठाने का साहस रखती हैं. ईरान में क्रांति से ऐन पहले का परिवेश हो या नारी का एक नया रूप ‘शालमली’ या फिर दुनिया में बढ़ता जल संकट – एक बड़ा दायरा और दुनिया है उनकी रचनाओं की. ‘पारिजात’ नासिरा शर्मा के अद्भुत सांस्कृतिक बोध का प्रमाण है. समाज और समय के निरीक्षण-परीक्षण का कौशल और शिल्प-शैली की उत्कृष्टता नासिरा शर्मा को विशिष्ट बनाते हैं.
स्त्री विमर्श अपने सभी रूपों में नारीवाद का मूल स्वर है. देश और दुनिया की अलग-अलग भाषाओं की तरह हिंदी में भी इस पर लंबे समय से लेखन और विमर्श चलता रहा है. भारत में समाज और सत्ता ही नहीं धर्म भी महिलाओं की स्थितियों के लिए महत्वपूर्ण कारक रहा है. समय के साथ उसमे बदलाव को किस तरह देखा जाना चाहिए और आने वाले समय में संभावनाएं और चुनौतियां क्या हैं? – ऐसे प्रश्न के लिए नासिरा शर्मा सर्वाधिक समर्थ लेखकों-चिंतकों में आती हैं. ‘स्पंदन’ का मंच आपका हार्दिक स्वागत करता है.

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